राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा
विद्यालयी शिक्षा के लिए (NCF 2023 in Hindi)
NEP 2020 नीतिगत दृष्टिकोण को कक्षा अभ्यास और विद्यालयी वास्तविकता में रूपांतरित करना। व्यापक 5+3+3+4 विद्यालयी चरणों, 8 पाठ्यचर्या क्षेत्रों, 5-स्तरीय अधिगम मानकों, शिक्षणशास्त्र और क्षमता-आधारित आकलन दर्शन का अन्वेषण करें।
परिचय: NCF-SE 2023 क्या है?
भारतीय विद्यालयी शिक्षा में आधिकारिक जनादेश, भूमिका और पाठ्यचर्या की व्यापक परिभाषा की समझ।
NCF-SE की प्राथमिक भूमिका
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा - विद्यालयी शिक्षा (NCF-SE 2023) राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दृष्टिकोण को सभी भारतीय विद्यालयों में ठोस शिक्षणशास्त्र, अधिगम मानकों, विषय संरचना और आकलन प्रणालियों में रूपांतरित करने का प्राथमिक संक्रियात्मक मार्गदर्शक है।
पाठ्यपुस्तक से आगे व्यापक पाठ्यचर्या
NCF-SE 2023 में "पाठ्यचर्या" पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम से कहीं अधिक व्यापक है। इसमें विद्यालय में विद्यार्थी द्वारा अनुभव किए जाने वाले सभी अवसर शामिल हैं—कक्षा का शिक्षणशास्त्र, भौतिक वातावरण, संस्थागत संस्कृति, आकलन पद्धतियाँ और पाठ्येतर गतिविधियाँ।
पाठ्यचर्या किस प्रकार लक्ष्यों को विद्यालय संस्कृति से जोड़ती है
शैक्षिक उद्देश्य
समग्र विकसित नागरिकों के लिए व्यापक उद्देश्य एवं विज़न
पाठ्यचर्या विषय-वस्तु
चयनित ज्ञान, क्षमताएँ, मूल्य एवं प्रवृत्तियाँ
चरणवार शिक्षणशास्त्र
आयु-अनुकूल शिक्षण, पूछताछ एवं अनुभवात्मक अधिगम
आकलन एवं परख (PARAKH)
सतत रचनात्मक एवं क्षमता-आधारित मूल्यांकन
अधिगम वातावरण
समावेशी, प्रेरणादायी एवं सुरक्षित विद्यालयी ढांचा
विद्यालय संस्कृति
नैतिक अभ्यास, लोकतांत्रिक मूल्य एवं विश्वास
सरल शब्दों में
NEP 2020 हमें बताता है कि क्या प्राप्त करना है (विज़न एवं नीतिगत दिशा)।
NCF-SE 2023 दिखाता है कि दैनिक कक्षा शिक्षण और विद्यालय संरचना में इसे कैसे प्राप्त करें।
यह विद्यालयों को रटंत प्रणाली से हटाकर गहरी समझ, आलोचनात्मक चिंतन और व्यावहारिक अनुप्रयोग की ओर ले जाता है।
यह 3 वर्ष (पूर्व-प्राथमिक/बालवाटिका) से 18 वर्ष (कक्षा 12) तक के प्रत्येक बच्चे को कवर करता है।
NCF-SE 2023 और NEP 2020 का संबंध
NEP 2020 के राष्ट्रीय लक्ष्यों को NCF-SE 2023 किस प्रकार व्यावहारिक कक्षाओं में साकार करता है।
NEP 2020 राष्ट्रीय शिक्षा की नई दिशा तय करता है; NCF-SE 2023 उसे विद्यालयी पाठ्यचर्या और दैनिक कक्षाओं में लागू करता है।
परीक्षा के भय को दूर कर 5-स्तरीय अधिगम मानक शृंखला (Goals -> Competencies -> LOs) की स्थापना।
बुनियादी (खेल), प्रारंभिक (अंतःक्रिया), मध्य (विषय परिचय), और माध्यमिक (बहुविषयक विकल्प) चरणों का कार्यान्वयन।
गणित, विज्ञान, पर्यावरण और कला में भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) का स्वाभाविक पठन-पाठन।
NCF-SE 2023 की शैक्षिक दृष्टि
स्वतंत्र, तर्कसंगत, संवेदनशील, रचनात्मक और नैतिक नागरिकों का निर्माण करना जो 21वीं सदी की क्षमताओं से सुसज्जित हों।
“NCF-SE 2023 का दृष्टिकोण एक ऐसा शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो प्रत्येक बच्चे को एक स्वावलंबी, तर्कसंगत, करुणामय, रचनात्मक और नैतिक नागरिक के रूप में विकसित करे, जो 21वीं सदी की क्षमताओं से युक्त हो तथा भारतीय विरासत पर गर्व करता हो।”— NCF-SE 2023 आधिकारिक प्रस्तावना
विद्यालयी शिक्षा के व्यापक उद्देश्य
NCF-SE 2023 में परिभाषित 5 मुख्य उद्देश्य जो सभी पाठ्यचर्या क्षेत्रों और विद्यालयी अभ्यासों का मार्गदर्शन करते हैं।
तर्कसंगत विचार एवं स्वायत्तता (Rational Thought & Autonomy)
स्वतंत्र सोच, साक्ष्य-आधारित तर्क, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता का विकास।
स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण (Health & Well-being)
शारीरिक क्षमता, मोटर विकास, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक लचीलापन और आजीवन स्वस्थ आदतों का संवर्धन।
लोकतांत्रिक एवं सामुदायिक सहभागिता (Democratic Participation)
संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, सहानुभूति, समानता, न्याय और सक्रिय नागरिक सहभागिता का समावेश।
आर्थिक सहभागिता एवं कौशल निपुणता (Economic Participation & Skills)
उत्पादक व्यावसायिक कौशलों, गणितीय तर्क, प्रौद्योगिकी प्रवाह और कार्य नैतिकता से विद्यार्थियों को सुसज्जित करना।
सांस्कृतिक सहभागिता एवं सौंदर्यबोध (Cultural & Aesthetic Expression)
भारतीय कलाओं, साहित्य, विरासत, रचनात्मक अभिव्यक्ति और वैश्विक सांस्कृतिक जागरूकता के प्रति सम्मान।
4 विद्यालयी चरण (आयु 3 से 18 वर्ष)
NCF-SE 2023 विद्यालयी शिक्षा को चार विकासात्मक चरणों में पुनर्गठित करता है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी शिक्षाशास्त्र पद्धति, भाषा नीति और मूल्यांकन दर्शन है।
बुनियादी चरण (Foundational Stage)
प्रारंभिक बचपन के विकास, खेल-आधारित अन्वेषण, सामाजिक-भावनात्मक विकास और बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN / निपुण भारत) पर ध्यान केंद्रित करता है।
पाठ्यचर्या क्षेत्र एवं भाषाएँ
भाषा नीति: प्राथमिक शिक्षण माध्यम के रूप में मातृभाषा / स्थानीय भाषा। मौखिक भाषा का विकास, कहानियाँ, तुकबंदी और चित्र पठन।
मुख्य क्षेत्र:
- शारीरिक एवं मोटर विकास (पंचकोश - अन्नमय कोश)
- सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास (प्राणमय / मनोमय कोश)
- संज्ञानात्मक एवं गणितीय सोच (विज्ञानमय कोश)
- भाषा और बुनियादी साक्षरता (FLN)
- सौंदर्यबोध एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्ति (कला एवं खेल)
शिक्षणशास्त्र एवं कक्षा अभ्यास
खेल-आधारित, गतिविधि-आधारित, पूछताछ-प्रेरित शिक्षण, कहानी वाचन, गीत, कठपुतली शो, बाहरी खेल और स्थानीय खिलौनों का उपयोग।
आकलन दृष्टिकोण:
पूर्णतः गैर-औपचारिक। निरंतर गुणात्मक अवलोकन, उपाख्यानात्मक रिकॉर्ड (Anecdotal Records), पोर्टफोलियो कार्य और शून्य औपचारिक परीक्षा।
मुख्य विशेषताएं:
प्रारंभिक चरण (Preparatory Stage)
शुद्ध खेल से अंतःक्रियात्मक कक्षा शिक्षण की ओर क्रमिक संक्रमण, औपचारिक पठन-पाठन, गणितीय अवधारणाओं और पर्यावरण खोज (EVS) का निर्माण।
पाठ्यचर्या क्षेत्र एवं भाषाएँ
भाषा नीति: दो भाषाएँ (R1: घर की भाषा / मातृभाषा, R2: दूसरी भाषा)। पठन बोध और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर ध्यान।
मुख्य क्षेत्र:
- भाषा 1 (R1) और भाषा 2 (R2)
- गणित (मूर्त से अमूर्त अवधारणाएँ)
- हमारे आसपास की दुनिया (समेकित पर्यावरण अध्ययन - EVS)
- कला शिक्षा एवं शारीरिक शिक्षा
शिक्षणशास्त्र एवं कक्षा अभ्यास
अंतःक्रियात्मक खोज, गतिविधि-आधारित शिक्षण, निर्देशित पठन, समूह कार्य, सरल प्रयोग और गणितीय खेल।
आकलन दृष्टिकोण:
निरंतर रचनात्मक अवलोकन के साथ सरल आवधिक लिखित मूल्यांकन, कार्यपत्रक (Worksheets), लघु प्रश्नोत्तरी और पोर्टफोलियो समीक्षा।
मुख्य विशेषताएं:
मध्य चरण (Middle Stage)
विषय-उन्मुख शिक्षण का परिचय; गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, भाषाओं और व्यावसायिक कौशलों में अमूर्त अवधारणाओं की शुरुआत।
पाठ्यचर्या क्षेत्र एवं भाषाएँ
भाषा नीति: तीन भाषाएँ (R1, R2, R3 - जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ शामिल हों)। साहित्यिक बोध, व्याकरण और स्वतंत्र पठन।
मुख्य क्षेत्र:
- तीन भाषाएँ (R1, R2, R3)
- गणित एवं संगणनात्मक सोच (Computational Thinking)
- विज्ञान (भौतिक, रासायनिक एवं जैविक अन्वेषण)
- सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, सामाजिक व राजनीतिक जीवन)
- कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा (10 बस्ता-रहित दिन)
शिक्षणशास्त्र एवं कक्षा अभ्यास
विषय-आधारित प्रयोगात्मक शिक्षण, अवधारणात्मक समझ, प्रोजेक्ट कार्य, प्रयोगशाला गतिविधियाँ, व्यावहारिक व्यावसायिक अनुभव (Hands-on Vocational Exposure)।
आकलन दृष्टिकोण:
रचनात्मक और योगात्मक (Formative & Summative) का संतुलित मिश्रण। प्रोजेक्ट कार्य, व्यावहारिक प्रदर्शन, अवधारणात्मक परीक्षण और स्व-आकलन।
मुख्य विशेषताएं:
माध्यमिक चरण (Secondary Stage)
बहुविषयक, विकल्प-आधारित अध्ययन; गहरा अवधारणात्मक बोध, आलोचनात्मक चिंतन, लचीलापन और उच्च शिक्षा/करियर की तैयारी। कला, विज्ञान और वाणिज्य धाराओं का विलोपन।
पाठ्यचर्या क्षेत्र एवं भाषाएँ
भाषा नीति: चरण 1 (कक्षा 9-10) में 2 भाषाएँ (कम से कम एक भारतीय भाषा)। चरण 2 (कक्षा 11-12) में 1 भाषा अनिवार्य।
मुख्य क्षेत्र:
- कक्षा 9-10: 8 विषय समूह (2 भाषाएँ + गणित + विज्ञान + सामाजिक विज्ञान + कला + शारीरिक शिक्षा + व्यावसायिक शिक्षा)
- कक्षा 11-12: लचीला विकल्प (4 विषय समूह में से विषय चयन) - विज्ञान, मानवीय, सामाजिक विज्ञान, कला, व्यावसायिक अध्ययन का स्वतंत्र संयोजन
शिक्षणशास्त्र एवं कक्षा अभ्यास
गहन अध्ययन, अंतर्विषयी दृष्टिकोण, शोध-आधारित प्रोजेक्ट, वाद-विवाद, संगणनात्मक मॉडल और व्यावहारिक प्रयोगशालाएँ।
आकलन दृष्टिकोण:
क्षमता-आधारित आकलन। द्वि-वार्षिक/सत्र-आधारित बोर्ड परीक्षाएँ, पोर्टफोलियो, 360-डिग्री समग्र प्रगति कार्ड (HPC) और PARAKH मानदंड।
मुख्य विशेषताएं:
अधिगम मानक स्थापत्य (Learning Standards Architecture)
5-स्तरीय क्षैतिज पदानुक्रम: बाईं ओर नीतिगत विज़न, मध्य में मुख्य पाठ्यचर्या लक्ष्य, और दाईं ओर दैनिक कक्षा अधिगम परिणाम।
व्यापक उद्देश्य (Broad Aims of Education)
संविधान, राष्ट्रीय नीति (NEP 2020) और भारतीय समाज की आकांक्षाओं से प्राप्त शिक्षा के उच्चतम मूलभूत उद्देश्य।
उद्देश्य एवं भूमिका
राष्ट्रीय नीति निर्माता, NCF संचालन समितियाँ और NCERT/SCERT।
NCF व्यावहारिक उदाहरण
एक लोकतांत्रिक, समतावादी और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण हेतु तर्कसंगत, नैतिक और संवेदनशील नागरिकों का पोषण।
पाठ्यचर्या संबंधी लक्ष्य (Curricular Goals)
विशिष्ट विद्यालयी चरणों (जैसे बुनियादी, प्रारंभिक, मध्य, माध्यमिक) और पाठ्यचर्या क्षेत्रों के लिए निर्धारित विशिष्ट शैक्षिक लक्ष्य।
उद्देश्य एवं भूमिका
पाठ्यचर्या विकासकर्ता, NCERT/SCERT पाठ्यपुस्तक मंडल।
NCF व्यावहारिक उदाहरण
प्रारंभिक चरण में बच्चे गणितीय सोच और बुनियादी चार संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) में दक्षता अर्जित करते हैं।
दक्षताएँ (Competencies)
ज्ञान, कौशलों, प्रवृत्तियों और मूल्यों के वे विशिष्ट समुच्चय जो विद्यार्थियों को पाठ्यचर्या लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं।
उद्देश्य एवं भूमिका
अध्यापक, पाठ्यपुस्तक लेखक, परीक्षा बोर्ड (CBSE/State Boards)।
NCF व्यावहारिक उदाहरण
विभिन्न दैनिक संदर्भों में 2-अंकीय और 3-अंकीय संख्याओं के जोड़ और घटाव की प्रक्रियाओं को सही ढंग से लागू करना।
अधिगम प्रतिफल (Learning Outcomes)
विशिष्ट कक्षा स्तर और विषय के लिए स्पष्ट, मापने योग्य और अवलोकनीय बिंदु जिन्हें विद्यार्थी नियमित अंतराल पर प्रदर्शित करते हैं।
उद्देश्य एवं भूमिका
कक्षा अध्यापक, विद्यालय आकलनकर्ता, PARAKH मूल्यांकन विशेषज्ञ।
NCF व्यावहारिक उदाहरण
विद्यार्थी 3-अंकीय दी गई संख्याओं को स्थानीय मान के आधार पर तुलना करता है और आरोही/अवरोही क्रम में लिखता है।
कक्षा अभ्यास एवं विषय-वस्तु (Classroom Practices)
शिक्षणशास्त्र, अधिगम सामग्री (TLM), पाठ्यपुस्तकें, गतिविधियाँ और दैनिक योजनाएँ जो अधिगम प्रतिफलों को साकार बनाती हैं।
उद्देश्य एवं भूमिका
कक्षा शिक्षक, मेंटर्स, शैक्षिक समन्वयक।
NCF व्यावहारिक उदाहरण
स्थानीय कंकड़, तीलियों और संख्या-कार्ड का उपयोग करके खेल-खेल में समूह बनाकर जोड़ की गतिविधि कराना।
8 पाठ्यचर्या क्षेत्र (Eight Curricular Areas)
NCF-SE 2023 के तहत 8 प्राथमिक विषय समूह जो विद्यालयी शिक्षा में सर्वांगीण विकास का आधार बनते हैं।
1. भाषा शिक्षा (Language Education)
बहु-भाषा महारत के माध्यम से प्रभावी संप्रेषण, साहित्यिक प्रशंसा, आलोचनात्मक चिंतन, सांस्कृतिक जुड़ाव और संज्ञानात्मक लचीलेपन का विकास करना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: मातृभाषा/घर की भाषा में मौखिक भाषा, कहानियाँ, तुकबंदी, बातचीत, और बुनियादी पढ़ना/लिखना।
- प्रारंभिक: R1 (घर की भाषा) में औपचारिक पढ़ना और लिखना + R2 का परिचय। साहित्यिक सराहना और रचनात्मक अभिव्यक्ति।
- मध्य: तीन भाषाएँ (R1, R2, R3 - कम से कम दो भारतीय भाषाएँ)। व्याकरण, साहित्यिक आलोचना, और डिजिटल पठन।
- माध्यमिक: उन्नत साहित्य, अलंकार शास्त्र, व्यावसायिक लेखन, और भारतीय भाषाई विरासत के साथ वैकल्पिक विदेशी भाषाएँ।
कहानी वाचन, निर्देशित पठन, संवाद, नाटक, रचनात्मक लेखन, बहुभाषी सहपाठी चर्चाएँ, और अनुवाद अभ्यास।
श्रवण बोध, अभिव्यंजक वाचन, पठन प्रवाह, आनुमानिक लेखन, और रचनात्मक रचना।
2. गणित एवं संगणनात्मक सोच (Mathematics & Computational Thinking)
तार्किक सोच, मात्रात्मक तर्क, स्थानिक अंतर्दृष्टि, समस्या-समाधान, पैटर्न पहचान, और एल्गोरिदम प्रवाह का संवर्धन करना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: संख्या बोध, गिनती, मूर्त वस्तुओं का वर्गीकरण, आकृति पहचान, और खेलों के माध्यम से गणितीय खेल।
- प्रारंभिक: चार बुनियादी संक्रियाएँ (+, -, ×, ÷), भिन्न, माप, पैटर्न, और ज्यामितीय आकृतियाँ।
- मध्य: बीजगणितीय सोच, अनुपात, प्रतिशत, ज्यामिति उपपत्तियाँ (Proofs), डेटा विश्लेषण, और बुनियादी कोडिंग/एल्गोरिदम तर्क।
- माध्यमिक: उन्नत बीजगणित, त्रिकोणमिति, कलन (Calculus) की नींव, सांख्यिकी, गणितीय मॉडलिंग, और कंप्यूटर विज्ञान के विकल्प।
मूर्त-चित्रात्मक-अमूर्त (CPA) अनुक्रम, गणित खेल, पहेली-समाधान, वास्तविक दुनिया का अनुमान, कोडिंग लैब, और ऐतिहासिक भारतीय गणितीय योगदान (आर्यभट्ट, रामानुजन)।
सूत्रों के रटने के बजाय समस्या-समाधान रणनीतियों, अवधारणात्मक समझ, तर्क उपपत्तियों, और दैनिक संदर्भों में अनुप्रयोग का आकलन।
3. विज्ञान शिक्षा (Science Education)
जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यवस्थित अवलोकन, परिकल्पना परीक्षण, साक्ष्य-आधारित तर्क, और पर्यावरणीय जागरूकता का पोषण करना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: मैदानी खेल के दौरान प्रकृति, जानवरों, पौधों, ऋतुओं और प्राकृतिक घटनाओं का इंद्रियजन्य अवलोकन।
- प्रारंभिक: समेकत "हमारे आसपास की दुनिया" (EVS), पौधों के जीवन का अवलोकन, पानी, मौसम, सरल प्रयोग, और पर्यावरण।
- मध्य: विषय-आधारित विज्ञान अवधारणाएँ (भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान), वैज्ञानिक पद्धति, प्रयोगशाला प्रयोग, और पर्यावरणीय चुनौतियाँ।
- माध्यमिक: विशेषज्ञ भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अंतर्विषयी पर्यावरण विज्ञान, अनुसंधान परियोजनाएँ, और तकनीकी अनुप्रयोग।
व्यावहारिक प्रयोग, मैदानी अवलोकन, पूछताछ प्रश्न, विज्ञान प्रदर्शनियाँ, डेटा विश्लेषण, और दावों का आलोचनात्मक मूल्यांकन।
परिकल्पनाएँ तैयार करना, प्रयोगों को डिजाइन करना, डेटा की व्याख्या करना, तार्किक बहस, और व्यावहारिक लैब कौशल।
5. कला शिक्षा (Art Education)
रचनात्मकता, सौंदर्यशास्त्र सराहना, भावनात्मक अभिव्यक्ति, संवेदी परिष्कार, सांस्कृतिक गौरव और कल्पना को बढ़ावा देना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: स्वतंत्र चित्रकारी, मिट्टी के खिलौने, गायन, नृत्य, लयात्मक गति, और कहानी वाचन।
- प्रारंभिक: संरचित दृश्य कला, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, नाटकीय अभिव्यक्ति, और स्थानीय शिल्प परियोजनाएँ।
- मध्य: औपचारिक कला तकनीकें, भारतीय कला विरासत, गायन/वादन संगीत, नाटक निर्माण, और डिजिटल डिजाइन की बुनियादी बातें।
- माध्यमिक: ललित कला, संगीत विधाओं, थियेटर कला, डिजाइन, वास्तुकला, और डिजिटल मीडिया में विशेष विकल्प।
व्यावहारिक निर्माण, कला सराहना सत्र, सांस्कृतिक उत्सव, सहयोगात्मक प्रस्तुतियाँ, और स्थानीय कारीगरों से संवाद।
कलाकृतियों का पोर्टफोलियो, रचनात्मक प्रक्रिया मूल्यांकन, प्रदर्शन में भागीदारी, सौंदर्यबोध चिंतन, बजाय कलात्मक पूर्णता के ग्रेडिंग के।
6. अंतर्विषयी क्षेत्र (Interdisciplinary Areas)
कठोर विषय सीमाओं को तोड़ना और विद्यार्थियों को बहुविषयक दृष्टिकोणों की आवश्यकता वाली जटिल, वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में सक्षम बनाना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: कहानियों, प्रकृति, संख्याओं और कला को सहजता से जोड़ने वाला समेकित शिक्षण।
- प्रारंभिक: विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और स्वास्थ्य को मिलाने वाला समेकित पर्यावरण अध्ययन (EVS)।
- मध्य: इतिहास को विज्ञान से, गणित को संगीत से, और तकनीक को कला से जोड़ने वाली अंतर्विषयी परियोजनाएँ।
- माध्यमिक:
प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण, बहु-शिक्षक सेमिनार, वास्तविक दुनिया की समस्या समाधान, और डिजाइन थिंकिंग कार्यशालाएँ।
बहुविषयक प्रोजेक्ट रिपोर्ट, समस्या-समाधान पोर्टफोलियो, अनुसंधान प्रस्तुतियाँ, और सहपाठी मूल्यांकन।
7. शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण (Physical Education & Well-being)
शारीरिक फिटनेस, मोटर कौशल, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक लचीलापन, टीम वर्क, खेल भावना, और आजीवन स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: स्वतंत्र गति, स्थूल/सूक्ष्म मोटर खेल, लयात्मक खेल, बुनियादी स्वच्छता, और मैदानी मज़ा।
- प्रारंभिक: संरचित खेल, टीम समन्वय, शारीरिक चपलता, खेल भावना, और स्वास्थ्य जागरूकता।
- मध्य: औपचारिक खेल कौशल, एथलेटिक्स, योग अभ्यास, शारीरिक फिटनेस दिनचर्या, और पोषण शिक्षा।
- माध्यमिक: विशेषज्ञ खेल कोचिंग, फिटनेस प्रशिक्षण, खेल विज्ञान की बुनियादी बातें, मानसिक स्वास्थ्य, और कल्याण नेतृत्व।
दैनिक शारीरिक गतिविधि, खेल प्रतियोगिताएँ, योग सत्र, वेलनेस कार्यशालाएँ, आउटडोर एडवेंचर, और टीम बिल्डिंग खेल।
शारीरिक फिटनेस प्रगति, सक्रिय भागीदारी, खेल भावना, टीम वर्क, और स्वास्थ्य आदतें, न कि केवल प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स।
8. व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education)
श्रम के प्रति सम्मान, व्यावहारिक प्रयोगात्मक कौशल, आर्थिक स्वावलंबन, तकनीकी क्षमता, और करियर जागरूकता विकसित करना।
चरणवार प्रगति (Stage Progression)
- बुनियादी: दैनिक उपकरणों से परिचित होना, बागवानी, सफाई करना, और स्थानीय शिल्प का अवलोकन करना।
- प्रारंभिक: सरल व्यावहारिक क्राफ्ट प्रोजेक्ट, पेपर क्राफ्ट, मिट्टी का काम, और बुनियादी उपकरण सुरक्षा।
- मध्य: 10 बस्ता-रहित दिन (10 Bagless Days), स्थानीय शिल्प, बढ़ईगीरी, इलेक्ट्रिकल मरम्मत, बागवानी, कुम्हारी, और कोडिंग का व्यावहारिक अनुभव।
- माध्यमिक: औपचारिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम, उद्योग अप्रेंटिसशिप, कौशल प्रमाणन, उद्यमिता परियोजनाएँ, और विशेषज्ञता।
व्यावहारिक कार्यशालाएँ, 10 बस्ता-रहित दिन गतिविधियाँ, स्थानीय कारीगरों/व्यवसायों के साथ इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट निर्माण, और कौशल प्रदर्शन।
व्यावहारिक कौशल निष्पादन, प्रोजेक्ट पूरा करना, कारीगरी की गुणवत्ता, पोर्टफोलियो दस्तावेज़ीकरण, और कार्य नैतिकता।
शिक्षणशास्त्रीय दर्शन एवं शिक्षण दृष्टिकोण
रटंत कक्षा निर्देशों से हटकर पूछताछ, अनुभवात्मक अधिगम और छात्र स्वायत्तता की ओर बदलाव
अनुभवात्मक एवं गतिविधि-आधारित अधिगम
करके सीखना—मूर्त गतिविधियों, भौतिक जोड़-तोड़, प्रयोगों, भूमिका अभिनय और प्रयोगात्मक अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को संलग्न करना।
पूछताछ एवं खोज-प्रेरित
विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, घटनाओं का अवलोकन करने, परिकल्पनाएँ बनाने, विचारों का परीक्षण करने और स्वतंत्र रूप से सिद्धांतों की खोज करने के लिए प्रेरित करना।
गलतियों से सीखना
त्रुटियों को असफलता मानने के बजाय बहुमूल्य सीखने के अवसरों के रूप में देखना, जिससे विकासशील मानसिकता और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा का पोषण हो।
संदर्भगत एवं स्थानीय एकीकरण
अवधारणाओं को विद्यार्थी के भौतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में स्थापित करना, स्थानीय संसाधनों और भाषाओं का उपयोग करना।
प्रत्यक्ष निर्देश एवं पाड़ (Scaffolding)
जटिल तकनीकी अवधारणाओं का परिचय देते समय संतुलित शिक्षक मार्गदर्शन, संरचित अभ्यास, और फिर विद्यार्थियों को जिम्मेदारी सौंपना।
सहयोगात्मक एवं सहपाठी अधिगम
सामाजिक कौशल, सहानुभूति और सामूहिक ज्ञान निर्माण के लिए समूह परियोजनाएँ, सहपाठी फीडबैक, जोड़ी कार्य और टीम समस्या-समाधान।
चरणवार शिक्षणशास्त्र एवं कक्षा व्यवस्था
| विद्यालयी चरण | प्राथमिक शिक्षण विधियाँ | शिक्षक की भूमिका | कक्षा व्यवस्था (Layout) |
|---|---|---|---|
| बुनियादी चरण (आयु 3-8) | खेल-आधारित, गीत, कहानियाँ, कठपुतली, बाहरी अन्वेषण, कला और स्वतंत्र खेल। | पोषणकर्ता, खेल सुगमकर्ता, वातावरण संयोजक, कहानीकार। | लचीले गतिविधि कोने, कम ऊंचाई वाली पुस्तकें, खुले खेल क्षेत्र, स्थानीय खिलौना बक्से। |
| प्रारंभिक चरण (आयु 8-11) | अंतःक्रियात्मक खोज, निर्देशित पठन, सरल विज्ञान प्रयोग, गणितीय खेल और समूह कार्य। | मार्गदर्शक, सुगमकर्ता, प्रश्नकर्ता, अन्वेषण प्रोत्साहनकर्ता। | सहयोगात्मक बैठने के समूह, पठन कोने, विज्ञान अवलोकन टेबल। |
| मध्य चरण (आयु 11-14) | विषय पूछताछ, 10 बस्ता-रहित दिन (10 Bagless Days) कार्यशालाएँ, कोडिंग लैब, क्षेत्र भ्रमण और वाद-विवाद। | विषय विशेषज्ञ, मेंटर, पूछताछ उत्प्रेरक, प्रोजेक्ट सलाहकार। | विषय-समर्पित कमरे, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, कंप्यूटर लैब, व्यावसायिक कार्यशालाएँ। |
| माध्यमिक चरण (आयु 14-18) | गहन शोध, संगोष्ठियाँ (Seminars), प्रयोगशाला कार्य, अंतर्विषयी परियोजनाएँ और स्व-निर्देशित अध्ययन। | अकादमिक मेंटर, आलोचनात्मक पूछताछ सुगमकर्ता, करियर मार्गदर्शन परामर्शदाता। | उन्नत प्रयोगशालाएँ, सेमिनार व्यवस्था, अनुसंधान पुस्तकालय, डिजिटल मीडिया रूम। |
NCF-SE में अंतर्विषयी विषय (Cross-Cutting Themes)
सभी 4 विद्यालयी चरणों और 8 पाठ्यचर्या क्षेत्रों में अंतर्निहित आवश्यक शैक्षिक आयाम।
भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ (IKS) एवं भारत में जड़ें
आधुनिक विज्ञान, गणित, साहित्य और सामाजिक अध्ययन को भारत की समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत से जोड़ना।
राष्ट्रीय गर्व, आत्मविश्वास, और वैश्विक समस्याओं के स्वदेशी समाधानों की सराहना का पोषण करता है।
गणित (आर्यभट्ट, भास्कर), विज्ञान (आयुर्वेद, धातु विज्ञान, खगोल विज्ञान), सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, कला और नैतिकता में समेकित।
विद्यार्थी बिना किसी कट्टरता के प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों (तक्षशिला, नालंदा), स्थानीय कारीगरी, कृषि ज्ञान, स्थापत्य और दार्शनिक परंपराओं के बारे में सीखते हैं।
पर्यावरण शिक्षा एवं सतत विकास
प्रारंभिक बचपन से ही पर्यावरण साक्षरता, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई जागरूकता और सतत जीवन शैली की आदतों का विकास।
भावी पीढ़ियों को जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि, प्रदूषण और संसाधन संरक्षण का सामना करने के लिए तैयार करता है।
बुनियादी खेल, प्रारंभिक चरण में EVS, मध्य चरण में विज्ञान व सामाजिक विज्ञान, और माध्यमिक चरण में विशेष परियोजनाओं में शामिल।
व्यावहारिक गतिविधियों में वृक्षारोपण, कचरा पृथक्करण, जल संचयन, ऊर्जा संरक्षण ऑडिट और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन शामिल है।
समावेशन, विविधता एवं लिंग समता
सभी पृष्ठभूमियों, क्षमताओं और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) के बच्चों के लिए बाधा-रहित, न्यायसंगत शैक्षिक पहुँच और सफलता सुनिश्चित करना।
शिक्षा एक मौलिक मानव अधिकार है; हर बच्चा गरिमा, समान अवसर और अनुकूलित शिक्षण सहायता का हकदार है।
कक्षा अभ्यास, सुलभ बुनियादी ढांचा, सहायक प्रौद्योगिकियां, लिंग-तटस्थ शिक्षण सामग्री और शिक्षक प्रशिक्षण।
भौतिक सुलभता, सांकेतिक भाषा, ब्रेल, दिव्यांग छात्रों के लिए अनुकूलन, लैंगिक रूढ़िवादिता का उन्मूलन और भाषाई विविधता का सम्मान।
मूल्य, नैतिकता एवं संवैधानिक प्रवृत्तियाँ
मूल नैतिक मूल्यों, सहानुभूति, सत्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व और भारतीय संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति निष्ठा का संवर्धन।
चरित्र के बिना ज्ञान हानिकारक हो सकता है; मूल्य जिम्मेदार निर्णय लेने और लोकतांत्रिक नागरिकता का मार्गदर्शन करते हैं।
दैनिक प्रार्थना सभा, कहानियाँ, सहयोगात्मक समूह कार्य, सामुदायिक सेवा, पंचकोश विकास और सामाजिक विज्ञान।
मुख्य मूल्यों में सत्य, अहिंसा, निष्काम कर्म, लोकतांत्रिक भागीदारी, न्याय, समानता और स्वच्छता शामिल हैं।
शैक्षिक प्रौद्योगिकी एवं मार्गदर्शन सेवाएँ
व्यक्तिगत शिक्षण के लिए डिजिटल उपकरणों का लाभ उठाना और साथ ही करियर मार्गदर्शन व मनोवैज्ञानिक कल्याण सहायता प्रदान करना।
मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और करियर की तैयारी को सुरक्षित रखते हुए विद्यार्थियों को डिजिटल युग के लिए तैयार करता है।
दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल, गणित में संगणनात्मक सोच, विज्ञान में वर्चुअल लैब, माध्यमिक चरण में करियर परामर्श।
प्रौद्योगिकी का जिम्मेदार उपयोग, डिजिटल सुरक्षा, AI साक्षरता, करियर खोज, और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संरचित मार्गदर्शन व परामर्श।
मूल्यांकन दर्शन एवं बोर्ड परीक्षा सुधार
उच्च-तनाव वाली रटंत परीक्षाओं से सतत, क्षमता-आधारित समग्र मूल्यांकन की ओर बदलाव
अधिगम के लिए आकलन (Formative)
सीखने की प्रक्रिया के दौरान निरंतर फीडबैक ताकि विद्यार्थियों को सुधार में मदद मिले और शिक्षक शिक्षण रणनीति समायोजित कर सकें।
अधिगम के रूप में आकलन (Self-Reflection)
विद्यार्थियों को स्वयं की सीखने की प्रगति और आदतों का अवलोकन, चिंतन और स्व-नियमन करने में सक्षम बनाना।
अधिगम का आकलन (Summative)
एक निश्चित शिक्षण अवधि या चरण के अंत में निर्धारित अधिगम प्रतिफलों (LOs) के विरुद्ध छात्र उपलब्धि का मूल्यांकन।
मूल्यांकन में दृष्टिकोण परिवर्तन (Paradigm Shift)
बोर्ड परीक्षा एवं परख (PARAKH) सुधार
विद्यालय संस्कृति, लोकाचार एवं संस्थागत प्रक्रियाएँ
विद्यालयों को स्नेही, जीवंत, सुरक्षित और लोकतांत्रिक शिक्षण समुदायों में बदलना
संबंध एवं सम्मान
शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय कर्मचारियों के बीच सुदृढ़, सम्मानजनक और विश्वास आधारित संबंधों का संवर्धन।
सुरक्षा एवं समावेशन
धमकाने (Bullying), भेदभाव या शारीरिक दंड के लिए शून्य सहनशीलता। सभी बच्चों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित माहौल।
लोकतांत्रिक छात्र आवाज
छात्र परिषद, छात्र-नेतृत्व वाली समितियों, कक्षा मॉनिटरों का प्रोत्साहन और विद्यालयी निर्णयों में सक्रिय भागीदारी।
जिज्ञासा एवं अन्वेषण संस्कृति
विद्यार्थियों को बिना किसी भय के प्रश्न पूछने, अपनी राय व्यक्त करने और स्वतंत्र रूप से खोजने के लिए प्रेरित करना।
दैनिक संस्थागत प्रक्रियाओं का कायाकल्प
विद्यालय प्रार्थना सभा (School Assembly)
सार्थक, प्रेरणादायी सभाएँ जिसमें समाचार वाचन, सुविचार, बहुभाषी गीत, शारीरिक व्यायाम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल हों।
जीवंत पुस्तकालय अभ्यास
आयु-अनुकूल पुस्तकों, कहानी वाचन सत्रों, डिजिटल पठन टर्मिनलों और मोबाइल बुक कॉर्नर के साथ सुलभ पुस्तकालय।
कक्षा संगठन एवं व्यवस्था
स्वच्छ, हवादार, विद्यार्थियों के कलाकृतियों से सजी कक्षाएँ, सुलभ सामग्री और लचीली समूह बैठने की व्यवस्था।
पोषणयुक्त भोजन समय (Mid-Day Meal)
गरिमा के साथ परोसा जाने वाला स्वच्छ पीएम पोषण भोजन, जो सामाजिक समरसता, स्वस्थ खान-पान आदतों और स्वच्छता को बढ़ावा देता है।
सहायक शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र
NCF की सफलता के लिए शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, परिवारों और समुदायों को सशक्त बनाना
1. शिक्षक एवं शिक्षक सशक्तीकरण
शैक्षिक सुधार का हृदय- शिक्षक स्वायत्तता: उपयुक्त शिक्षणशास्त्र विधियों और शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLMs) को चुनने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना।
- सतत व्यावसायिक विकास (CPD): निष्ठा (NISHTHA) एवं दीक्षा (DIKSHA) के माध्यम से प्रतिवर्ष कम से कम 50 घंटे का अनिवार्य गुणवत्तापूर्ण CPD।
- शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (NPST): स्पष्ट करियर पथ, योग्यता-आधारित पदोन्नति और सम्मानजनक पहचान।
- सहायक कार्य वातावरण: पर्याप्त शिक्षण संसाधन, प्रशासनिक बोझ में कमी और संतुलित छात्र-शिक्षक अनुपात।
2. प्रेरणादायी शिक्षण वातावरण
तृतीय शिक्षक- भौतिक बुनियादी ढांचा: सुरक्षित, हवादार कक्षाएँ, स्वच्छ पेयजल, पृथक शौचालय, खेल के मैदान और सुलभ रैंप।
- शिक्षण संसाधन: कम लागत वाले स्थानीय खिलौने, विज्ञान किट, गणितीय उपकरण, खेल सामग्री और डिजिटल स्मार्ट बोर्ड।
- विद्यालय परिसर (School Complexes): माध्यमिक और आसपास के प्राथमिक विद्यालयों को प्रयोगशालाओं व खेल मैदानों के संसाधन साझाकरण हेतु जोड़ना।
3. विद्यालय नेता एवं प्रशासक
निर्देशात्मक एवं दूरदर्शी नेतृत्व- शुद्ध प्रशासनिक प्रबंधन से हटकर सक्रिय निर्देशात्मक नेतृत्व और अकादमिक मेंटरशिप की ओर परिवर्तन।
- शिक्षकों के बीच सहयोगात्मक पेशेवर शिक्षण समुदाय (PLC) का संवर्धन।
- पारदर्शी शासन, संसाधन आवंटन और अभिभावक-शिक्षक संप्रेषण सुनिश्चित करना।
4. परिवार एवं समुदाय सहभागिता
बाल विकास में सह-भागीदार- विद्यालय प्रबंधन समितियाँ (SMC): विद्यालय विकास योजनाओं में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता।
- अभिभावक-शिक्षक बैठकें (PTM): केवल अंकों के स्थान पर 360° समग्र प्रगति कार्ड (HPC) पर आधारित सार्थक चर्चाएँ।
- सामुदायिक संसाधन व्यक्ति: वास्तविक दुनिया के ज्ञान को साझा करने के लिए स्थानीय कारीगरों, किसानों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और बुजुर्गों को आमंत्रित करना।
NCF-SE 2023 किसके लिए है?
NCF-SE 2023 शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के हर हितधारक के लिए परिवर्तनकारी लाभ लेकर आता है।
विद्यार्थी (Students)
विकल्प और समझ के साथ शिक्षार्थियों को सशक्त बनाना
शिक्षक (Teachers)
अकादमिक स्वायत्तता एवं सतत व्यावसायिक विकास
विद्यालय नेता एवं प्रधानाचार्य (Principals)
निर्देशात्मक नेतृत्व एवं संसाधन अनुकूलन
अभिभावक एवं समुदाय (Parents)
समग्र बाल विकास में सह-भागीदार
पाठ्यचर्या एवं सामग्री विकासकर्ता
पाठ्यपुस्तकों एवं डिजिटल सामग्री का ब्लूप्रिंट
NCF-SE 2023 कार्यान्वयन पथ
राष्ट्रीय विज़न को राज्य पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों, शिक्षक प्रशिक्षण और कक्षा की वास्तविकता में रूपांतरित करना
NCF-SE 2023 का प्रकाशन
समग्र दिशा-निर्देश, अधिगम मानक और चरणवार डिजाइन प्रदान करने वाला राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा प्रकाशित।
राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (SCF)
राज्य क्षेत्रीय संदर्भ, स्थानीय भाषाओं और संस्कृति को दर्शाने के लिए NCF-SE दिशा-निर्देशों को SCF में ढालते हैं।
पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक विकास
दक्षता-संरेखित नए पाठ्यक्रम, कक्षावार पाठ्यपुस्तकों, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं और डिजिटल शिक्षण मॉड्यूल का निर्माण।
शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM)
स्थानीय खिलौना-आधारित किट, गणितीय उपकरण, विज्ञान प्रयोगशाला किट और बहुभाषी डिजिटल संसाधनों का विकास।
शिक्षक क्षमता निर्माण
सभी 4 चरणों में दक्षता-आधारित शिक्षणशास्त्र, आकलन और समावेशन पर शिक्षकों का बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण।
आकलन एवं परख (PARAKH) संरेखन
बोर्ड परीक्षाओं का पुनर्गठन, 360° समग्र प्रगति कार्ड अपनाना और क्षमता-आधारित मूल्यांकन मदों की स्थापना।
कक्षा निष्पादन एवं छात्र अनुभव
गतिविधि-आधारित अधिगम, पूछताछ, खेल और समग्र छात्र विकास के साथ दैनिक कक्षा का कायाकल्प।
NCF-SE 2023 आधिकारिक हिंदी शब्दावली
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE 2023) की प्रमुख तकनीकी शब्दावली, अवधारणाएँ और आधिकारिक संक्षिप्त रूप।
पाठ्यचर्या (Curriculum)
विद्यालय में विद्यार्थियों के संपूर्ण अधिगम अनुभवों का समग्र समेकन; इसमें उद्देश्य, विषय-वस्तु, शिक्षणशास्त्र, सामग्री और आकलन शामिल हैं।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा - विद्यालयी शिक्षा (2023)
NEP 2020 की सिफारिशों के आलोक में 3 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए NCERT द्वारा विकसित आधिकारिक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा।
शिक्षा के व्यापक उद्देश्य (Broad Aims)
संविधान और NEP 2020 से प्राप्त शिक्षा के सर्वोच्च दीर्घकालिक मानवीय, सामाजिक और राष्ट्रीय लक्ष्य।
पाठ्यचर्या संबंधी लक्ष्य (Curricular Goals)
विशिष्ट विद्यालयी चरणों और पाठ्यचर्या क्षेत्रों के लिए निर्धारित विशिष्ट शैक्षिक लक्ष्य जिन्हें प्राप्त किया जाना है।
दक्षताएँ (Competencies)
ज्ञान, कौशलों, प्रवृत्तियों और मूल्यों का वह एकीकृत समुच्चय जिसे विद्यार्थी पाठ्यचर्या लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रदर्शित करते हैं।
अधिगम प्रतिफल (Learning Outcomes)
विशिष्ट कक्षा स्तर और विषय के लिए निर्धारित अवलोकनीय एवं मापने योग्य परिणाम जो नियमित अंतरालों पर मूल्यांकित होते हैं।
पंचकोश अवधारणा (तैत्तिरीय उपनिषद आधारित)
मानव व्यक्तित्व के 5 आयामों का विकास: अन्नमय (शारीरिक), प्राणमय (प्राण/ऊर्जा), मनोमय (मानसिक/भावनात्मक), विज्ञानमय (बौद्धिक) और आनंदमय (आत्मिक आनंद)।
बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN)
कक्षा 3 तक सभी बच्चों द्वारा समझ के साथ पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणितीय संक्रियाओं को हल करने की क्षमता।
परख (PARAKH - राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र)
भारत का राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र जो सभी परीक्षा बोर्डों के लिए मूल्यांकन मानक, छात्र आकलन और क्षमता-आधारित मानदंड निर्धारित करता है।
360-डिग्री समग्र प्रगति कार्ड (HPC)
केवल अंकों के स्थान पर विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, कलात्मक और शारीरिक विकास को दर्शाने वाला 360-डिग्री रिपोर्ट कार्ड।
भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ (IKS)
गणित, विज्ञान, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कला और दर्शन में भारत की प्राचीन एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का आधुनिक पाठ्यचर्या में एकीकरण।
दीक्षा पोर्टल (DIKSHA)
भारत का राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म जो शिक्षकों और विद्यार्थियों को क्यूआर-कोड युक्त पाठ्यपुस्तकें और डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराता है।
10 बस्ता-रहित दिन (10 Bagless Days)
मध्य चरण (कक्षा 6-8) में 10 दिनों की गतिविधि अवधि जहाँ विद्यार्थी बिना बस्ते के आते हैं और स्थानीय कारीगरों, उद्योगों व कौशलों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं।
अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning)
गतिविधियों, प्रयोगों, कला, खेल और प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से स्वयं करके सीखने की वैज्ञानिक पद्धति।
सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
NCF-SE 2023, 5+3+3+4 संरचना, अधिगम मानकों, शिक्षणशास्त्र और आकलन से जुड़े प्रमुख प्रश्नों के अधिकृत उत्तर।