राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारतीय शिक्षा का क्रांतिकारी दृष्टिकोण
10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 ढांचा, बहु-विषयक अध्ययन, बुनियादी साक्षरता और 21वीं सदी के कौशलों से परिपूर्ण एक व्यापक, स्क्रॉल-आधारित नीतिगत अनुभव।
मुख्य स्तंभ एवं परिवर्तनकारी राष्ट्रीय लक्ष्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा निर्धारित प्रमुख राष्ट्रीय मानक, नामांकन लक्ष्य और संरचनात्मक परिवर्तन।
5+3+3+4 ढांचा
स्कूली शिक्षा की नई संरचना (आयु 3 से 18 वर्ष)
100% GER (2030)
प्री-स्कूल से माध्यमिक तक सार्वभौमिक नामांकन
50% GER (2035)
उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात का लक्ष्य
6% GDP लक्ष्य
शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने का संकल्प
21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप एक समग्र एवं परिवर्तनकारी शिक्षा नीति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने 34 वर्ष पुरानी 1986 की नीति का स्थान लिया है। यह नीति भारतीय मूल्यों, भाषाओं और संस्कृति से जुड़ी रहते हुए आधुनिक तकनीकी प्रगति, रचनात्मकता और नवाचार के साथ भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने के उद्देश्य से लाई गई है।
रटंत विद्या के स्थान पर तार्किक चिंतन
पारंपरिक व्यवस्था केवल परीक्षा में रटने पर आधारित थी। NEP 2020 अवधारणात्मक समझ, विश्लेषण और रचनात्मक समस्या-समाधान पर बल देती है।
प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) का समावेश
मस्तिष्क का 85% विकास 6 वर्ष की आयु से पूर्व हो जाता है। पुरानी नीतियों में 3 से 6 वर्ष की अनदेखी थी; NEP 2020 इसे 5+3+3+4 ढांचे में औपचारिक शिक्षा का आधार बनाती है।
संकायों (Streams) के कठोर अलगाव का अंत
कला, विज्ञान, वाणिज्य, व्यावसायिक और पाठ्यचर्या विषयों के बीच की हानिकारक दीवारों को तोड़कर बहु-विषयक अध्ययन का अवसर देना।
भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति का संरक्षण
मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षण, भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) का एकीकरण और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी युवाओं का निर्माण।
शिक्षा प्रणाली का मार्गदर्शन करने वाले मूलभूत सिद्धांत
वह दार्शनिक आधार जो NEP 2020 के प्रत्येक नीतिगत निर्देश, पाठ्यचर्या निर्माण और शिक्षणशास्त्रीय सुधार को दिशा देता है।
प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट क्षमताओं की पहचान
शिक्षकों और अभिभावकों को संवेदनशील बनाकर प्रत्येक छात्र के शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना।
बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान को प्राथमिकता
कक्षा 3 तक सभी बच्चों द्वारा बुनियादी पढ़ने, लिखने और गणित की क्षमता हासिल करने को सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता देना।
लचीलापन और अध्ययन विकल्पों की स्वतंत्रता
छात्रों को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुसार अपने सीखने के मार्ग और विषय चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता देना।
कला और विज्ञान के बीच कठोर अलगाव का अंत
पाठ्यचर्या और सह-पाठ्यचर्या, कला और विज्ञान, तथा व्यावसायिक और अकादमिक धाराओं के बीच के हानिकारक अलगाव को समाप्त करना।
बहु-विषयक और समग्र शिक्षा
विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, मानविकी और खेलकूद के बीच समन्वय स्थापित कर समग्र ज्ञान की एकता निर्मित करना।
रटने के बजाय अवधारणात्मक समझ पर जोर
परीक्षा-केंद्रित रटंत विद्या के स्थान पर विषय की गहरी अवधारणात्मक समझ, तार्किक सोच और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना।
नैतिकता और संवैधानिक मूल्य
सहानुभूति, दूसरों के प्रति सम्मान, स्वच्छता, लोकतांत्रिक भावना, सेवा भावना, संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करना।
बहुभाषावाद और मातृभाषा की शक्ति
शिक्षण और अधिगम में मातृभाषा/स्थानीय भाषा के उपयोग को प्राथमिकता देना तथा भाषाई विविधता का सम्मान करना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के 5 मजबूत स्तंभ
पहुंच, समता, गुणवत्ता, सस्ती शिक्षा और जवाबदेही — भारतीय शिक्षा के समग्र कायाकल्प के आधार स्तंभ।
पहुंच (Access)
हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच
प्री-स्कूल से उच्चतर शिक्षा तक बाधा-मुक्त पहुंच सुनिश्चित करना तथा 3.22 करोड़ आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में पुनः जोड़ना।
समता एवं समावेश (Equity)
वंचित वर्गों के लिए विशेष शैक्षणिक प्रोत्साहन
सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs), बालिकाओं और दिव्यांग छात्रों के लिए लक्षित योजनाएं।
गुणवत्ता (Quality)
वैश्विक मानक एवं परिवर्तनकारी शिक्षणशास्त्र
पाठ्यचर्या, शिक्षक प्रशिक्षण, संस्थागत प्रशासन और मूल्यांकन प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बनाना।
सस्ती शिक्षा (Affordability)
किफायती और गैर-व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था
उच्च गुणवत्ता की शिक्षा को बिना किसी व्यावसायिक शोषण के हर आर्थिक वर्ग के लिए वहनीय बनाना।
जवाबदेही (Accountability)
पारदर्शी विनियमन एवं परिणाम-उन्मुख शासन
नीति निर्माण, संचालन, प्रत्यायन और मानक निर्धारण को स्वतंत्र निकायों में बांटकर पारदर्शी बनाना।
स्कूली शिक्षा का व्यापक कायाकल्प
3 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए पाठ्यचर्या, शिक्षणशास्त्र, मूल्यांकन और विद्यालयी परिवेश का पुनर्गठन।
3-6 वर्ष के लिए सार्वभौमिक ECCE
खेल-आधारित NCPFECCE पाठ्यचर्या के साथ बालवाटिका को औपचारिक शिक्षा में शामिल करना।
बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान (निपुण)
कक्षा 3 तक सभी बच्चों द्वारा बुनियादी पढ़ने व गणित क्षमता प्राप्त करना सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता।
स्ट्रीम-मुक्त बहु-विषयक माध्यमिक स्कूल
कला, विज्ञान, वाणिज्य और व्यावसायिक विषयों के बीच की कठोर सीमाओं का अंत।
परख (PARAKH) एवं 360° मूल्यांकन
रटंत परीक्षा के स्थान पर निरंतर दक्षता-आधारित मूल्यांकन और वर्ष में 2 बार बोर्ड परीक्षा का विकल्प।
स्कूली शिक्षा के 4 विकासात्मक चरण (आयु 3 से 18 वर्ष)
पुरानी 10+2 व्यवस्था के स्थान पर चार विकासात्मक चरण, जिनमें से प्रत्येक के अपने अनुकूलित पाठ्यचर्या, शिक्षणशास्त्र और मूल्यांकन सिद्धांत हैं।
बुनियादी चरण (Foundational Stage)
खेल-कूद, गतिविधि-आधारित और खोज-आधारित लचीला अधिगम। शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक विकास और प्रारंभिक भाषा एवं संख्या-ज्ञान पर विशेष जोर।
ध्वनि जागरूकता, शब्दावली, संख्या-ज्ञान, 99 तक गिनती, सरल आकृतियों की पहचान और खेल व कहानियों के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक आदतें।
पूरी तरह से गैर-औपचारिक। स्थानीय खिलौने, गीत, कठपुतली, चित्र पठन और स्थानीय सामग्रियों के साथ व्यावहारिक अनुभव बिना किसी भारी बस्ते के।
Expected Learning Outcomes & Policy Directives:
प्रारंभिक चरण (Preparatory Stage)
खेल और गतिविधि-आधारित शिक्षण के साथ-साथ हल्की पाठ्यपुस्तकों और इंटरैक्टिव कक्षा शिक्षण का परिचय। पढ़ना, लिखना, शारीरिक शिक्षा, कला, विज्ञान और गणित की नींव।
पठन समझ, गणितीय चिंतन, वैज्ञानिक जिज्ञासा, कलात्मक अभिव्यक्ति और पर्यावरणीय जागरूकता को सुदृढ़ बनाना।
अनुभवात्मक और परिचर्चा-आधारित शिक्षण। कहानियों, कला, खेल और अंतर्विषयी जुड़ाव के साथ आनंददायी पठन।
Expected Learning Outcomes & Policy Directives:
मध्यम चरण (Middle Stage)
विज्ञान, गणित, कला, सामाजिक विज्ञान और मानविकी में अधिक अमूर्त अवधारणाओं (Abstract Concepts) का परिचय। विषय शिक्षकों द्वारा अनुभवात्मक अधिगम।
अमूर्त तार्किक सोच, वैज्ञानिक जांच, कम्प्यूटेशनल विचार और व्यावहारिक व्यावसायिक शिल्पों में निपुणता।
विषय-केंद्रित अनुभवात्मक शिक्षण। प्रयोगशाला प्रयोग, कोडिंग परियोजनाएं, क्षेत्रीय भ्रमण और स्थानीय कारीगरों के साथ इंटर्नशिप।
Expected Learning Outcomes & Policy Directives:
माध्यमिक चरण (Secondary Stage)
बहु-विषयक अध्ययन, गहन विषय ज्ञान, उच्च क्रमिक सोच (Critical Thinking), और विषयों के चयन में अत्यधिक लचीलापन। कला, विज्ञान और वाणिज्य का स्ट्रीम-मुक्त एकीकरण।
उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक सोच, विश्लेषणात्मक गहराई, नैतिक निर्णय क्षमता और करियर की आकांक्षाओं के अनुसार विशेषज्ञता।
सेमिनार शैली की चर्चाएं, परियोजना-आधारित अध्ययन, स्वतंत्र शोध और उद्योग/क्षेत्रीय इंटर्नशिप।
Expected Learning Outcomes & Policy Directives:
पाठ्यचर्या और अनुभवात्मक शिक्षण-शास्त्र
कक्षाओं को मूक श्रवण से सक्रिय खोज एवं रचनात्मक संवाद में बदलना
अनुभवात्मक एवं खोज-आधारित अधिगम
किताबी रटन के स्थान पर व्यावहारिक प्रयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षेत्रीय भ्रमण और परियोजना कार्य।
कला एवं खेल-कूद का एकीकरण
दृश्य व प्रदर्शन कलाओं, योग और खेलों को अंतर्विषयी माध्यम बनाकर शारीरिक व मानसिक तंदुरुस्ती का विकास।
दक्षता-आधारित शिक्षा (Competency-Based)
पाठ्यचर्या को स्पष्ट अधिगम प्रतिफलों (LOs) पर आधारित करना, जहां छात्र वास्तविक दक्षता प्रदर्शित कर आगे बढ़ते हैं।
21वीं सदी के कौशलों का विकास
आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, सहयोग, संवाद, डिजिटल साक्षरता और भावनात्मक संतुलन का समग्र प्रशिक्षण।
भाषा और बहुभाषावाद की शक्ति
मातृभाषा एवं भाषाई विविधता के माध्यम से संज्ञानात्मक क्षमताओं का विस्तार
मातृभाषा में शिक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता
जहां तक संभव हो, कम से कम कक्षा 5 (अधिमानतः कक्षा 8) तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा/स्थानीय भाषा होगा।
लचीला त्रि-भाषा सूत्र
छात्र तीन भाषाएं सीखेंगे, जिनमें कम से कम दो भारतीय मूल भाषाएं होंगी। किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी।
भारतीय अनुवाद एवं व्याख्या संस्थान (IITI)
उच्च-स्तरीय अनुवाद संस्थान की स्थापना जिससे सभी अनुसूचित भारतीय भाषाओं में पुस्तकें और डिजिटल सामग्री उपलब्ध हो सके।
शास्त्रीय एवं जनजातीय भाषाओं का संवर्धन
संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, पाली, प्राकृत और फारसी को समृद्ध अनुभवात्मक साहित्य के रूप में प्रस्तुत करना।
मूल्यांकन सुधार एवं पारख (PARAKH)
रटने की परीक्षा से 360-डिग्री समग्र मूल्यांकन की ओर परिवर्तन
मूल्यांकन का मुख्य उद्देश्य
अंकों के आधार पर निर्णय, रैंकिंग और रटने का परीक्षण
रचनात्मक मूल्यांकन, निदानात्मक फीडबैक और निरंतर सीखने में सहयोग
बोर्ड परीक्षाएं
अत्यधिक तनावपूर्ण वार्षिक परीक्षा और कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता
दक्षता-आधारित परीक्षण और वर्ष में दो बार परीक्षा का विकल्प
प्रगति पत्र (Report Card)
केवल अंकों और ग्रेड्स वाला एक-आयामी रिपोर्ट कार्ड
360° समग्र प्रगति कार्ड (स्व-मूल्यांकन, सहपाठी मूल्यांकन और शिक्षक अवलोकन)
राष्ट्रीय मानक बेंचमार्किंग
अलग-अलग राज्य बोर्डों में मानकों की भारी असमानता
राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र "पारख" द्वारा एकसमान मूल्यांकन मानक एवं मानदंड
उच्चतर शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन
बहु-विषयक विश्वविद्यालय, संस्थागत स्वायत्तता और वैश्विक अनुसंधान संस्कृति
4-वर्षीय समग्र स्नातक डिग्री (FYUP)
मल्टीपल एंट्री और एग्जिट विकल्प: 1 वर्ष में सर्टिफिकेट, 2 वर्ष में डिप्लोमा, 3 वर्ष में डिग्री, और 4 वर्ष में ऑनर्स/रिसर्च के साथ स्नातक।
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC)
मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा दिए गए क्रेडिट को सुरक्षित डिजिटल रूप में संचित करने वाला बैंक, जिससे पढ़ाई बीच में छोड़ना और पुनः शुरू करना संभव।
भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (HECI)
UGC और AICTE के स्थान पर एकल नियामक जिसके 4 स्वतंत्र स्तंभ हैं: नियमन (NHERC), प्रत्यायन (NAC), वित्तपोषण (HEGC), और मानक (GEC)।
संबद्धता प्रणाली की चरणबद्ध समाप्ति
15 वर्षों में सभी संबद्ध कॉलेजों को क्रमिक स्वायत्तता प्रदान कर स्वायत्त डिग्री-दाता कॉलेज या विश्वविद्यालय के घटक कॉलेज में बदलना।
व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल एकीकरण
2030 तक 50% शिक्षार्थियों को व्यावसायिक कौशल से सशक्त बनाना
माध्यम स्कूल में 10 बस्ता-रहित दिन (10 Bagless Days)
कक्षा 6 से 8 के छात्र 10 दिन स्थानीय कारीगरों, बढ़ई, बागवानों, कुम्हारों और इलेक्ट्रीशियन के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण लेंगे।
NSQF दक्षताओं के साथ एकीकरण
स्कूल और कॉलेज स्तर के सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (NSQF) के मानकों से जोड़ना।
लोक विद्या का समावेश
भारत के पारंपरिक शिल्प, हस्तकला और स्वदेशी तकनीकी ज्ञान को मुख्यधारा की व्यावसायिक शिक्षा में स्थान देना।
व्यावसायिक शिक्षा को पूर्ण अकादमिक सम्मान
व्यावसायिक शिक्षा को दोयम दर्जे का मानने की मानसिकता समाप्त कर अकादमिक और व्यावसायिक मार्गों में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना।
शिक्षा में प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल अवसंरचना
राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF) एवं बहुभाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म
राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF)
सीखने, मूल्यांकन, प्रशासन और योजना में सुधार हेतु प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए स्वायत्त मंच।
दीक्षा (DIKSHA) राष्ट्रीय ज्ञान भंडार
बहुभाषी इंटरैक्टिव ई-पाठ्यपुस्तकें, क्यूआर-कोडित अभ्यास पत्र और पाठ योजनाएं उपलब्ध कराने वाला डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर।
वर्चुअल साइंस लैब्स एवं सिमुलेशन
दूरदराज के सभी छात्रों को उत्कृष्ट विज्ञान प्रयोगों और कम्प्यूटेशनल कोडिंग टूल्स की समान डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराना।
AI-आधारित अनुकूलनीय शिक्षण (Adaptive Learning)
व्यक्तिगत शिक्षण मार्ग, निदानात्मक कौशल ट्रैकिंग और दिव्यांग छात्रों के लिए सहायक पहुंच प्रौद्योगिकियां।
शिक्षक एवं शिक्षक शिक्षा
शिक्षकों को समाज में सर्वोच्च सम्मान, स्वायत्तता और व्यावसायिक मानक प्रदान करना
2030 तक 4-वर्षीय एकीकृत B.Ed (ITEP) अनिवार्य
बहु-विषयक उच्च शिक्षण संस्थानों में संचालित 4-वर्षीय एकीकृत ITEP कार्यक्रम स्कूली शिक्षकों के लिए न्यूनतम अर्हक डिग्री बनेगी।
निष्ठा (NISHTHA) के माध्यम से 50 घंटे वार्षिक CPD
प्रत्येक शिक्षक और प्रधानाचार्य के लिए आधुनिक शिक्षणशास्त्र और प्रौद्योगिकी पर प्रति वर्ष कम से कम 50 घंटे का सतत व्यावसायिक विकास अनिवार्य।
शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (NPST)
NCTE द्वारा पारदर्शी प्रदर्शन बेंचमार्क, योग्यता-आधारित पदोन्नति और करियर प्रगति ढांचे का निर्धारण।
पारदर्शी एवं योग्यता-आधारित भर्ती
कठोर TET परीक्षा, कक्षा शिक्षण प्रदर्शन साक्षात्कार और पारदर्शी कम्प्यूटरीकृत स्थानांतरण प्रणाली।
समता और समावेश: सभी के लिए शिक्षा
सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) का संपूर्ण सशक्तिकरण
जेंडर समावेश कोष (Gender Inclusion Fund)
बालिकाओं और ट्रांसजेंडर छात्रों के 100% नामांकन, सुरक्षा, साइकिल, छात्रावास और स्वच्छता सुविधाओं के लिए विशेष वित्तीय कोष।
विशेष शिक्षा क्षेत्र (Special Education Zones - SEZs)
वंचित और जनजातीय आबादी के उच्च घनत्व वाले भौगोलिक क्षेत्रों के लिए विशेष शैक्षणिक पैकेज।
दिव्यांग-अनुकूल विद्यालय
बाधा-मुक्त भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर, भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) का मानकीकरण और ब्रेल डिजिटल पठन तकनीकें।
KGBVs और आश्रमशालाओं का विस्तार
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का कक्षा 12 तक विस्तार और जनजातीय आवासीय आश्रमशालाओं का आधुनिकीकरण।
भारतीय ज्ञान प्रणालियां (IKS)
21वीं सदी के शिक्षण को भारत की समृद्ध विरासत एवं दर्शन से जोड़ना
गणित एवं खगोल विज्ञान
आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य और माधव के बीजगणित, कैलकुलस, शून्य और ग्रह विज्ञान के योगदान का प्रासंगिक अध्ययन।
आयुर्वेद, धातु विज्ञान एवं वास्तुकला
पारंपरिक स्वास्थ्य विज्ञान, जड़ी-बूटी चिकित्सा, प्राचीन धातु चमत्कार और वर्षा जल संचयन वास्तुकला ज्ञान।
जनजातीय ज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण
स्थायी पारिस्थितिकीय संरक्षण, जैविक खेती, जैव-विविधता संरक्षण और स्थानीय जनजातीय शिल्प कौशल।
पंचकोश समग्र बाल विकास मनोविज्ञान
5-स्तरीय विकासात्मक मॉडल (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय, आनंदमय) जो बाल विकास का मार्गदर्शन करता है।
अनुसंधान एवं नवाचार: राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (NRF)
विश्वविद्यालयों में उच्च प्रभाव वाली शोध संस्कृति का निर्माण
राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (NRF) अनुदान
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी में प्रतिस्पर्धी अनुसंधान अनुदान उपलब्ध कराना।
मॉडल बहु-विषयक विश्वविद्यालय (MERUs)
देश भर में IITs और IIMs के समकक्ष उत्कृष्ट अनुसंधान संस्थानों की स्थापना जो अंतर्विषयी शोध को बढ़ावा दें।
उद्योग-अकादमिक-सरकार समन्वय
विश्वविद्यालय परिसरों में प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर और बौद्धिक संपदा (IP) समर्थन की स्थापना।
कार्यान्वयन रोडमैप एवं रणनीतिक लक्ष्य
2020 से 2040 तक चरणबद्ध एवं समयबद्ध क्रियान्वयन
NCF-FS एवं NCF-SE का विमोचन; निपुण भारत (NIPUN Bharat) एवं परख (PARAKH) की स्थापना।
कक्षा 3 के प्रत्येक बच्चे द्वारा बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान की प्राप्ति; 3-माह विद्या प्रवेश का 100% क्रियान्वयन।
प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक 100% सकल नामांकन अनुपात; सभी शिक्षकों के लिए 4-वर्षीय एकीकृत B.Ed अनिवार्य।
उच्चतर शिक्षा में 50% सकल नामांकन अनुपात; सभी संबद्ध कॉलेजों का स्वायत्त संस्थानों में रूपांतरण।
देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का विशाल बहु-विषयक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के रूप में संचालन।
अपेक्षित दीर्घकालिक परिवर्तन
भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करना
स्कूल से बाहर बच्चों की वापसी
सार्वभौमिक पहुंच और ठहराव नीतियों द्वारा हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना।
कक्षा 3 तक बुनियादी साक्षरता
प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी पठन और गणितीय संकट को पूरी तरह समाप्त करना।
उच्च शिक्षा में नामांकन (2035)
गुणवत्तापूर्ण बहु-विषयक अवसरों के साथ कॉलेज नामांकन को दोगुना करना।
शिक्षा में सार्वजनिक व्यय
अवसंरचना, तकनीक और शिक्षक विकास के लिए मजबूत वित्तीय बजट।
NEP 2020 सुधारों पर आधिकारिक और स्पष्ट उत्तर
5+3+3+4 संरचना, बोर्ड परीक्षा सुधार, भाषा नीति और उच्च शिक्षा से जुड़े सामान्य प्रश्नों के स्पष्ट समाधान।