गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय
2035 तक 50% सकल नामांकन अनुपात (GER), बहु-विषयक 4-वर्षीय यूजी कार्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC), NRF अनुसंधान और HECI नियमन।
प्रकरण 9 से 19 के मुख्य सुधार
बहु-विषयक शिक्षा, क्रेडिट बैंक, शोध प्रोत्साहन और एकल विनियामक संस्था।
50% GER (2035)
उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 26.3% से बढ़ाकर 2035 तक 50% करना तथा 3.5 करोड़ नई सीटों का सृजन।
बहु-विषयक 4-वर्षीय UG
मल्टीपल एंट्री और एग्जिट विकल्पों के साथ प्रमाणपत्र (1 वर्ष), डिप्लोमा (2 वर्ष), और शोध सहित डिग्री (4 वर्ष)।
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC)
डिजिटल क्रेडिट बैंक जिसमें छात्रों द्वारा अर्जित क्रेडिट्स सुरक्षित रहते हैं और हस्तांतरित किए जा सकते हैं।
HECI एकल विनियामक प्रणाली
UGC और AICTE के स्थान पर भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (HECI) के तहत 4 स्वतंत्र विनियामक स्तंभ।
राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (NRF)
देश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रतिस्पर्धी शोध अनुदान और उत्कृष्ट शोध संस्कृति का विकास।
अकादमिक स्वायत्तता और संबद्धता उन्मूलन
15 वर्षों में कॉलेजों की संबद्धता प्रणाली को समाप्त कर स्वायत्त डिग्री-देने वाले कॉलेजों का निर्माण।
भाग II के प्रकरण (प्रकरण 9 से 19)
गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय: भारत की उच्चतर शिक्षा प्रणाली का एक नया और आगे की ओर देखने वाला दृष्टिकोण
2035 तक उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 26.3% से बढ़ाकर 50% करना और बहु-विषयक संस्थानों का निर्माण।
संस्थागत पुनर्गठन और समेकन
संबद्धता (Affiliation) प्रणाली को 15 वर्षों में समाप्त करना और कॉलेजों को क्रमिक स्वायत्तता (Graded Autonomy) प्रदान करना।
समग्र और बहु-विषयक शिक्षा की ओर
लचीला 3 या 4 वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट विकल्प, और "अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स" (ABC) की स्थापना।
सीखने के लिए अनुकूलतम वातावरण और छात्र सहयोग
छात्रों को वित्तीय सहायता, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग, करियर मार्गदर्शन और जीवंत कैंपस जीवन प्रदान करना।
प्रेरित, सक्रिय और सक्षम संकाय
संकाय सदस्यों को योग्यता-आधारित नियुक्ति, अनुसंधान अनुदान, शिक्षण स्वायत्तता और करियर प्रगति के अवसर देना।
उच्चतर शिक्षा में समता और समावेश
सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) के लिए उच्च शिक्षा में गैर-भेदभावपूर्ण पहुंच सुनिश्चित करना।
शिक्षक शिक्षा (Teacher Education)
2030 तक बहु-विषयक संस्थानों में 4-वर्षीय एकीकृत B.Ed (ITEP) डिग्री अनिवार्य कर विश्वस्तरीय शिक्षक तैयार करना।
व्यावसायिक शिक्षा का नवीन आकल्पन
2030 तक कम से कम 50% शिक्षार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ना और इसे NSQF से संरेखित करना।
राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (NRF)
देश के सभी शैक्षणिक विषयों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को वित्तपोषित और मेंटर करने के लिए NRF की स्थापना।
उच्चतर शिक्षा की नियामक प्रणाली (HECI)
UGC और AICTE के स्थान पर भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (HECI) का एकल छत्र नियामक के रूप में गठन।
उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए प्रभावी प्रशासन और नेतृत्व
संस्थानों को स्वायत्त बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BoG) के माध्यम से योग्यता-आधारित शैक्षणिक व वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना।