प्रस्तावना और दृष्टिकोण
(Introduction & Vision of NEP 2020)
शिक्षा पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त करने, एक न्यायसंगत और निष्पक्ष समाज के विकास और राष्ट्रीय प्रगति को बढ़ावा देने के लिए मूलभूत आवश्यकता है।
21वीं सदी की वैश्विक शिक्षा चुनौतियां
वैश्विक शिक्षा विकास एजेंडा (सतत विकास लक्ष्य 4 - SDG4) 2030 तक "सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने और आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देने" का प्रयास करता है।
बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अभूतपूर्व वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के साथ, बच्चों को केवल ज्ञान प्राप्त करने के स्थान पर "सीखना कैसे है" (Learn How to Learn) सिखाना अति आवश्यक हो गया है।
प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की विरासत
ज्ञान (Jnan), प्रज्ञा (Pragyaa) और सत्य (Satya) की खोज को हमेशा भारतीय चिंतन और दर्शन में सर्वोच्च मानवीय लक्ष्य माना गया है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्थाओं ने बहु-विषयक अध्ययन और शोध के उच्चतम मानक स्थापित किए।
चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य, चाणक्य, पतंजलि और नागार्जुन जैसे महान भारतीय विद्वानों ने गणित, खगोल विज्ञान, धातुकर्म, चिकित्सा और नागरिक इंजीनियरिंग में विश्व ज्ञान को अमूल्य योगदान दिया।
मूलभूत मार्गदर्शक सिद्धांत
प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट क्षमताओं की पहचान
शिक्षकों और अभिभावकों को संवेदनशील बनाकर प्रत्येक छात्र के शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना।
बुनियादी साक्षरता (FLN) को सर्वोच्च प्राथमिकता
कक्षा 3 तक सभी बच्चों द्वारा पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणितीय ज्ञान प्राप्त करने का राष्ट्रीय मिशन।
अधिगम मार्गों का लचीलापन
छात्रों को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुसार अपने अध्ययन और करियर के मार्ग चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता देना।
कठोर अलगाव का उन्मूलन
कला और विज्ञान, पाठ्यचर्या और सह-पाठ्यचर्या, तथा व्यावसायिक और अकादमिक धाराओं के बीच के हानिकारक भेद को दूर करना।
बहु-विषयक और ज्ञान की समग्रता
विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, मानविकी और खेलकूद के बीच तालमेल बिठाकर समग्र शिक्षा प्रदान करना।
नैतिकता और संवैधानिक मूल्य
सहानुभूति, दूसरों के प्रति सम्मान, स्वच्छता, लोकतांत्रिक भावना, संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करना।