स्कूली शिक्षा का क्रांतिकारी पुनर्गठन
5+3+3+4 पाठ्यचर्या ढांचा, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE), बुनियादी साक्षरता (FLN), पारख (PARAKH) मूल्यांकन और शिक्षक सशक्तिकरण।
प्रकरण 1 से 8 के मुख्य स्तंभ
स्कूल पाठ्यचर्या, बाल्यावस्था देखभाल, शिक्षक सशक्तिकरण और समता सुधार।
प्रारंभिक बाल्यावस्था (ECCE)
3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी और बालवाटिका के माध्यम से खेल-कूद और गतिविधि आधारित सार्वभौमिक शिक्षा।
बुनियादी साक्षरता (FLN)
निपुण भारत मिशन द्वारा कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चा पढ़ना, लिखना और गणित सीखे, यह सर्वोच्च प्राथमिकता वाला लक्ष्य।
पारख (PARAKH) मूल्यांकन ढांचा
360-डिग्री बहुआयामी समग्र प्रगति कार्ड जो छात्र के स्व-मूल्यांकन, सहपाठी और शिक्षक समीक्षा को जोड़ता है।
10 बस्ता-रहित दिन (10 Bagless Days)
कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए स्थानीय कारीगरों के साथ व्यावहारिक कौशल सीखने हेतु 10 बस्ता-रहित दिन।
समता और समावेश (SEDGs)
सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों, बालिकाओं और दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षा क्षेत्र (SEZ) और जेंडर समावेश कोष।
SSSA स्वायत्त मानक प्राधिकरण
प्रत्येक राज्य में स्कूली शिक्षा के लिए पारदर्शी सार्वजनिक प्रकटीकरण और गुणवत्ता मानक सुनिश्चित करने हेतु गठन।
5 + 3 + 3 + 4 संरचना प्रणाली
(पुराने 10+2 स्थान पर नई शैक्षणिक व्यवस्था)
NEP 2020 द्वारा 3 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए 4 चरणों में स्कूली शिक्षा का पुनर्गठन। प्रारंभिक 3 वर्ष आंगनवाड़ी/बालवाटिका से लेकर 12वीं तक की समग्र यात्रा।
बुनियादी चरण (Foundational Stage)
खेल-कूद, गतिविधि-आधारित और खोज-आधारित लचीला अधिगम। शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक विकास और प्रारंभिक भाषा एवं संख्या-ज्ञान पर विशेष जोर।
पाठ्यचर्या दृष्टिकोण (Pedagogical Approach):
पूरी तरह से गैर-औपचारिक। स्थानीय खिलौने, गीत, कठपुतली, चित्र पठन और स्थानीय सामग्रियों के साथ व्यावहारिक अनुभव बिना किसी भारी बस्ते के।
प्रमुख विशेषताएं और बदलाव:
- स्व-देखभाल, सूक्ष्म और स्थूल गत्यात्मक समन्वय
- मातृभाषा में मौखिक प्रवाह और बुनियादी अक्षर-ज्ञान
- बुनियादी संख्या-ज्ञान: वर्गीकरण, गणना और पैटर्न पहचान
- शून्य परीक्षा तनाव: मूल्यांकन केवल गुणात्मक अवलोकन और पोर्टफोलियो द्वारा
भाग I के प्रकरण (प्रकरण 1 से 8)
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा: सीखने की नींव
6 वर्ष की आयु से पहले बच्चे के 85% से अधिक मस्तिष्क विकास के चरण में गुणवत्तापूर्ण ECCE की सार्वभौमिक पहुंच 2030 तक सुनिश्चित करना।
बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान: सीखने की एक तात्कालिक और आवश्यक पूर्व-शर्त
2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 3 तक सभी बच्चों द्वारा बुनियादी पढ़ने, लिखने और गणित की क्षमता प्राप्त करने का राष्ट्रीय मिशन।
ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या कम करना और सभी स्तरों पर शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना
2030 तक प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना और 3.22 करोड़ आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा में वापस लाना।
स्कूलों में पाठ्यचर्या और शिक्षण-शास्त्र: अधिगम समग्र, एकीकृत, आनंददायी और रुचिकर होना चाहिए
पुराने 10+2 ढांचे को 5+3+3+4 संरचना में पुनर्गठित करना, रटंत विद्या को समाप्त कर योग्यता-आधारित अनुभवात्मक शिक्षण अपनाना।
शिक्षक
शिक्षकों को समाज के सबसे सम्मानित सदस्यों के रूप में पुनः स्थापित करना, पारदर्शी भर्ती, निरंतर व्यावसायिक विकास (CPD) और स्वैच्छिक करियर प्रगति।
समतामूलक और समावेशी शिक्षा: सभी के लिए सीखने का अवसर
सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs), बालिकाओं, दिव्यांग बच्चों और जनजातीय क्षेत्रों के लिए समान और समावेशी शिक्षा।
स्कूल कॉम्प्लेक्स/क्लस्टर के माध्यम से कुशल संसाधन और प्रभावी गवर्नेंस
5-10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों का स्कूल कॉम्प्लेक्स में एकीकरण, जिससे प्रयोगशाला, खेल मैदान और विशेषज्ञ शिक्षकों की साझेदारी संभव हो सके।
स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारण और प्रत्यायन
नीति निर्धारण, स्कूल संचालन, शैक्षणिक गतिविधियों और विनियामक कार्यों को अलग-अलग स्वतंत्र निकायों को सौंपकर पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करना।